Shaheed Bhagat Singh Biography In Hindi | महान शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय 2024

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Shaheed Bhagat Singh Biography In Hindi: शहीद भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी माने जाते हैं। भगत सिंह ने सिर्फ 23 वर्ष की आयु में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन्होने देश के लिए अपना बलिदान दिया इसलिए आज भी भगत सिंह को याद किया जाता हैं। 27 सितंबर को हर वर्ष शहीद भगत सिंह जयंती मनाई जाती हैं।

भगत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ था। जब देश अंग्रेजो का गुलाम था तब भारतीयों पर अंग्रेजो के द्वारा खूब अत्याचार किया जाता था। यह अत्याचार भगत सिंह बचपन से देखते आ रहे थे। जब भगत सिंह युवा हुए तब उन्होंने अंग्रेजो के सामने आंदोलन करना शुरू किया। उस समय भगत सिंह नैजवानो के लिए एक यूथ आईकोन बन चुके थे।

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जब भगत सिंह आंदोलन करते थे तब देश के युवा भी उनके साथ जुड़ते थे। भगत सिंह को लगता था की देश के युवा भारत देश को गुलामी से आजाद करवा सकते हैं। वैसे देखा जाए तो भगत सिंह का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा था लेकिन वह युवाओं के लिए एक प्रेरणा देने वाले क्रांतिकारी थे।

आज हम इस लेख के माध्यम से Shaheed Bhagat Singh Biography In Hindi में जानेगे। इसके अलावा शहीद भगत सिंह से जुडी कुछ ऐसी बातो पर चर्चा करेगे जिसके बारे में काफी कम लोगो को पता होगा। तो आज का हमारा यह लेख अंत तक जरुर पढ़े।

Shaheed Bhagat Singh Biography In Hindi

तो आइये हम आपको भगत सिंह के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

शहीद भगत सिंह का जीवन परिचय (Shaheed bhagat singh biography in hindi)

नाम (Name)
भगत सिंह
जन्म दिनांक(Birth Date)
28 सितंबर 1907
जन्म स्थान (Birth Place)ग्राम बंगा, तहसील जरनवाला, जिला लायलपुर, पंजाब
पिता का नाम (Father Name)किशन सिंह
माता का नाम (Mother Name)विद्यावती कौर
भाई – बहन के नामरणवीर, कुलतार, राजिंदर, कुलबीर, जगत, प्रकाश कौर, अमर कौर, शकुंतला कौर
शिक्षा (Education)डीएवी हाई स्कूल, लाहौर, नेशनल कॉलेज, लाहौर
संगठनकीर्ति किसान पार्टी, नौजवान भारत सभा, क्रांति दल, हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
राजनीतिक विचारधाराराष्ट्रवाद, समाजवाद
मृत्यु (Death)23 मार्च 1931
मृत्यु का कारण
फांसी (सजा-ए-मौत)
मृत्यु का स्थान (Death Place)
लाहौर
स्मारक (Memorial)
द नेशनल शहीद मेमोरियल, हुसैनवाला, पंजाब

भगत सिंह का जन्म और प्रारंभिक जीवन परिचय (Information About Bhagat Singh)

भगत सिंह का जन्म पंजाब जिला लायलपुर में एक सिख परिवार में हुआ था। जब देश अंग्रेजो की गुलामी से बंधा हुआ था तब भगत सिंह ने देश को आज़ादी दिलवाने में खूब आंदोलन किये। और अंग्रेजो के सामने डट कर खड़े रहे। 

भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। ऐसा माना जाता है की जब भगत सिंह का जन्म हुआ तब उनके पिता किशन सिंह जेल में थे। भगत सिंह ने बचपन से ही अंग्रेजो की गुलामी को देखा था लेकिन साथ साथ बचपन से ही इनके घरवालो में देश भक्ति भी देखी थी। इस वजह से भगत सिंह भी एक बहुत बड़े देश भक्त और स्वतंत्रता संग्रामी क्रांतिकारी बने।

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भगत सिंह के चाचा अजित सिंह भी स्वतंत्रता संग्रामी क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने भी अंग्रेजो के खिलाफ खूब आंदोलन किये। ऐसा माना जाता है उस समय में भगत सिंह के चाचा अजित सिंह के खिलाफ 22 केस दर्ज हुए थे। इन सभी केस  से बचने के लिए भगत सिंह के पिता किशन सिंह ने उनको इरान भेज दिया था और उनका दाखिला दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल में करवा दिया था।

भगत सिंह का क्रांतिकारी इतिहास (Bhagat Singh History)

जब जलियांवाला बाग़ कांड हुआ था तब भगत सिंह की उम्र महज 12 वर्ष की थी। जलियांवाला बाग़ कांड सन 1919 को हुआ था। उस समय उनकी पढ़ाई लाहौर में चल रही थी। लेकिन जब जलियांवाला बाग़ कांड के बारे में उनको सुचना मिली तब वह तुरंत पैदल चलकर घटना स्थल पर पहुँच गए थे।

इस घटना को देखकर भगत सिंह बहुत दुखी हुए थे। जब इस घटना को भगत सिंह ने देखा तब उन्होंने मन ही मन में ठान लिया था कि वह अब भारत देश को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त करेगे। भगत सिंह क्रांतिकारी पुस्तके पढ़ते थे। इस वजह से हमेशा ही उनके मन में भारत को स्वतंत्रता दिलाने की चाह रहती थी।

उसी समय महात्मा गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की। इसमें बिना हिंसा किये भारत को गुलामी से आजाद करवाना था। लेकिन उस समय चन्द्र शेखर जैसे हिंसक आंदोलन करने वाले नेता भी मौजूद थे। उन्हें अहिंसा की जगह हिंसक आंदोलन करना पसंद था। इस वजह से काफी लोगो ने हिंसा का तो काफी लोगो ने अहिंसा का रास्ता चुना। 

लेकिन देश में हिंसात्मक गतिविधि अधिक चलने लगी तब गांधी जी ने असहयोग आंदोलन बंद कर दिया। उस समय भी भगत सिंह गांधी जी के इस फैसले से बिलकुल भी खुश नही थे लेकिन वह गांधी जी का सम्मान करते थे। इसलिए उनके इस फैसले का विरोध नही किया।

जब भगत सिंह नेशनल कॉलेज लाहौर से BA की पढ़ाई कर रहे थे तब उनका सुखदेव थापर और भगवती चरण से मिलना हुआ। उस समय देश में आजादी की लड़ाई खूब जोर शोर से चल रही थी। लोगो में देश प्रेम दिख रहा था। हर युवा और देश के सभी लोग आजादी चाहते थे। भगत सिंह भी देश प्रेमी थे। उन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लेना शुरू किया। इस वजह से उन्होंने अपने BA की पढ़ाई भी बीच में ही छोड़ दी।

इसी बीच भगत सिंह के परिवार ने उनकी शादी के बारे में सोचा और उनको शादी के लिए कहा। लेकिन भगत सिंह इसके लिए राजी नही हुए। उन्होंने घर वालो से शादी करने के लिए मना कर दिया। ऐसा माना जाता है कॉलेज के समय में भगत सिंह स्टेज पर नाटक में हिस्सा लिया करते थे। नाटक में भी वह क्रांतिकारी की भूमिका में नजर आते थे। वह नाटक के माध्यम से भी अंग्रेजो को नीचा दिखाया करते थे।

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कॉलेज समय में भगत सिंह को लिखने का भी काफी अधिक शौक था। वह अंग्रेजो के बारे में काफी कुछ लिखा करते थे। उन्हें निबंध आदि लिखना पसंद था। ऐसा माना जाता है की निबंध आदि में उन्हें काफी सारे पुरस्कार भी मिले थे।

भगत सिंह स्वतंत्रता की लड़ाई / असेंबली बम कांड

जब भगत सिंह की उम्र शादी योग्य हो गई तब उनके परिवार वालो ने उनकी शादी के लिए उनसे पूछा तब वह शादी के लिए नही माने और शादी के लिए इंकार कर दिया। जब उनके परिवार वालो ने उनको भरोसा दिलवाया की वह उनकी शादी फिलहाल नही करेगे। तब वह लाहौर से अपने घर लौट आये। 

उस समय भगत सिंह नौजवान भारत सभा का हिस्सा बने थे। इसके बाद कीर्ति किसान पार्टी भी जोर शोर से चल रही थी। इस पार्टी के लोगो के साथ मिलना चालू किया और मेल जोल बढ़ाया। उस समय इस पार्टी की मैगेजीन चलती थी जिसका नाम कीर्ति था। इस मैगेजीन के लिए भगत सिंह ने काम करना शुरू किया।

ऐसा माना जाता है भगत सिंह इस मैगेजीन के माध्यम से देश के युवाओं को संदेश पहुंचाते थे। भगत सिंह उर्दू लिखने में माहिर थे। इसलिए वह पंजाबी और उर्दू पेपर के लिए लिखने का काम भी करते थे। उनके लेखन में स्वतंत्रता की बात हमेशा होती थी। इस वजह से काफी नौजवान उनको मानने लगे थे।

भगत सिंह के अच्छे कार्य की वजह से उनको 1926 में नौजवान भारत का सेक्रेटरी बना दिया था। इसके बाद भगत सिंह ने चन्द्रशेखर आजाद के द्वारा बनाई गई मौलिक पार्टी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) को सन 1928 में ज्वाइन कर लिया।

इसके बाद लाला लाजपत राय के साथ मिलकर भगत सिंह ने साइमन कमीशन का भी विरोध किया। उस समय साइमन वापस जाओ का नारा लगाया गया। इस नारा बाजी में अंग्रेजो के साथ हिंसक प्रवृति शुरू हो गई और खूब लाठीचार्ज हुआ। इस लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय बुरी तरह से घायल हुए। और उनकी मृत्यु हो गई।

लालाजी की मृत्यु से भगत सिंह दुखी हुए। और मन ही मन उन्होंने और उनकी पार्टी ने लालाजी की मृत्यु का बदला लेने की ठान ली। उन्होंने लालाजी की मृत्यु के जिम्मेदार ऑफिसर स्कोट को मारने का प्लान उनकी पार्टी के लोगो के साथ बनाया। लेकिन भगत सिंह ने स्कोट की जगह गलती से दुसरे पुलिस वाले को मार दिया। 

इसके बाद ब्रिटिश सरकार इनको पकड़ने के लिए हाथ धोकर पीछे पड़ गई। जिससे बचने के लिए भगत सिंह वहा से फरार होकर लाहौर पहुँच गए। ऐसा माना जाता है की ब्रिटिश सरकार के लोग उन्हें पहचान ना ले इसलिए उन्होंने बाल और दाढ़ी भी कटवा दिए थे। यह उनके धर्म के विरुद्ध था। फिर भी देश प्रेम के लिए उन्होंने ऐसा किया।

लेकिन फरार होने के बाद भगत सिंह और उनकी पार्टी ने अंग्रेजो को बड़ा सबक सिखाने का सोचा। तब भगत सिंह, राजदेव सुखदेव और चन्द्रशेखर आजाद तीनो मिले और बड़ा धमाका असेंबली हॉल में करने के बारे में सोचा।

सन दिसंबर 1929 में भगत सिंह ने अपने साथियो के साथ मिलकर असेंबली में बम ब्लास्ट किया। यह बम सिर्फ आवाज करने वाला था। बम ब्लास्ट करते ही उन्होंने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाये। और वहां मौजूद लोगो में पर्चे बांटकर अपने आप को पुलिस के हवाले कर दिया।

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शहीद भगत सिंह की फांसी

असेंबली कांड के बाद भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव पर केस दर्ज हुआ और इन तीनो पर मुकदमा चला। जिसके बाद इन तीनो को फांसी की सजा सुनाई गई। जब कोर्ट में इन तीनो के खिलाफ फैसला सुनाया गया तब भी खूब तनाव का माहौल था। ऐसे तनाव में भी भगत सिंह और उनके साथी दोस्तों ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाये।

जब भगत सिंह जेल में थे तब भी पुलिस के द्वारा उनको यातनाए दी गई। उस समय कैदी बनकर जेल में रहना काफी सारी पुलिस की यातना को सहन करना पड़ता था। जेल में कैदियों के साथ अच्छा व्यवहार नही किया जाता था और खाना भी अच्छा नही मिलता था। 

जब भगत सिंह ने कैदियों की ऐसी स्थिति देखी तब उन्होंने जेल के अंदर से आंदोलन किये थे। यह आंदोलन कैदियों के हक में हुए थे। कैदियों को अच्छा खाना और उनके साथ अच्छा व्यवहार करने की भी मांग की थी। 

23 मार्च 1931 के दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार के द्वारा फांसी लगाई गई। जब इन तीनो की फांसी लग रही थी। तब भी इन तीनो ने अपना पसंदीदा इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया। 

शहीद भगत सिंह जयंती

देश के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी देने वाले क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह को आज भी याद किया जाता हैं। इन पर अभी तक शहीद और द लिजेंड ऑफ़ भगत सिंह जैसी फिल्मे भी बन चुकी हैं। सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में ही भगत सिंह को फांसी लगाई गई थी।

शहीद भगत सिंह को आज भी उनके जन्म दिन पर 27 सितंबर को शहीद भगत सिंह जयंती मनाई जाती हैं। इस दिन देश के सभी लोग उनको याद करते हैं। और उनको श्राधांजलि अर्पित करते हैं।

शहीद भगत सिंह की कविता

“इतिहास में गूँजता एक नाम हैं भगत सिंह
शेर की दहाड़ सा जोश था जिसमे वे थे भगत सिंह  
छोटी सी उम्र में देश के लिए शहीद हुए जवान थे भगत सिंह
आज भी जो रोंगटे खड़े करदे ऐसे विचारो के धनि थे भगत सिंह ।।”

Shaheed Bhagat Singh Biography in Hindi – FAQ’s (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

भगत सिंह कौन थे?

शहीद भगत सिंह एक क्रांतकारी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारत देश को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्ति दिलवाने के लिए आंदोलन किये थे।

शहीद भगत सिंह के पिता का नाम क्या था?

शहीद भगत सिंह के पिता का नाम किशन सिंह था|

शहीद भगत सिंह के चाचा का नाम क्या था?

शहीद भगत सिंह के चाचा का नाम अजित सिंह था।

भगत सिंह के गुरु का नाम क्या था?

भगत सिंह के गुरु का नाम सरतार सिंह था।

भगत सिंह के कितने भाई थे?

भगत सिंह के 5 भाई थे।

भगत सिंह की मृत्यु कैसे हुई?

भगत सिंह की मृत्यु फांसी देकर हुई थी। ब्रिटिश सरकार ने उनको फांसी की सजा सुनाई थी। 



निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस लेख के माध्यम से Shaheed Bhagat Singh Biography In Hindi  में चर्चा की है। इसके अलावा इस लेख के माध्यम से बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान की हैं। हम उम्मीद करते है कि आज का हमारा यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा। 

अगर आप और कुछ अधिक जानना चाहते हैं तो हमे कमेंट बोक्स में कमेंट करे। हम आपके प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करेगे। हमारा लेख पढने के लिए धन्यवाद।

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